मस्त विचार 736
चिराग सब के बुझते हैं, हवा किसी की नहीं होती.
अपनी रोशनी की बुलंदी पर, कभी न इतराना.
चिराग सब के बुझते हैं, हवा किसी की नहीं होती.
अपनी रोशनी की बुलंदी पर, कभी न इतराना.
जो तुमको देख ही नहीं पातीं…..
मैंने तो सुना है मेरे यार
तुम उनको भी नजर आते हो
जिनकी आंखे नहीं होतीं….
मैं अपना दर्द अब कम बांटता हूँ.
एक “कामयाबी” ही है, जो ठोकर खाकर ही मिलती है.
दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है,
“बेरंग है पानी फिर भी…जिन्दगी कहलाता है, ढेर सारे रंग हैं शराब के…,फिर भी गन्दगी कहलाता है. लोग भी कमाल करते हैं…जिन्दगी के गम भुलाने के लिये, गन्दगी में…जिन्दगी मिलाकर पीते हैं.
लाख टके की बात
कामयाबी तुम्हारे पीछे झक मार कर आएगी.
कामयाबी के पीछे मत भागो, काबिल बनो,