मस्त विचार 810
बस ‘दुआयें’ आप लोगों की उन्हें ‘मुकम्मल’ होने नही देती…..!!!
साज़िशें लाखो बनती हैं मेरी ‘हस्ती’ मिटाने की….!!!
बस ‘दुआयें’ आप लोगों की उन्हें ‘मुकम्मल’ होने नही देती…..!!!
साज़िशें लाखो बनती हैं मेरी ‘हस्ती’ मिटाने की….!!!
तेरे लिए दुआ माँगना अच्छा लगता है……..
तुझ से मेरा रिश्ता क्या है, मालूम तो नही मगर…
कदम-कदम पर समझौता मेरे बस की बात नहीं….!!!!
संघर्षो में यदि कटता है तो कट जाए सारा जीवन..!!
वरना लोगों की वाह -वाह में, खुद को न जाने क्या समझ बैठे.
मिल जाए कोई ऐसा, जो खामियां बताए मेरी.
और जो इंसान के बाहर छलक जायें वो ” अभिमान ”
इंसान के अंदर जो समा जायें वो ” स्वाभिमान “
जब बरसी ख़ुशियाँ न जाने भीड़ कहां से आ गयी..!!