मस्त विचार 724
फिर भी ना जाने, क्यूँ हर रोज कमाने जाता हूँ .
ना ख़ुशी खरीद पाता हूँ, ना ही गम बेच पाता हूँ.
फिर भी ना जाने, क्यूँ हर रोज कमाने जाता हूँ .
ना ख़ुशी खरीद पाता हूँ, ना ही गम बेच पाता हूँ.
फिर भी यदि आप अपने आप से मित्रता कर लें तो, आप कभी अकेला महसूस नहीं करेंगे.
निःसंदेह सच्चे मित्रों की आवश्यकता हमेशा रहती है,
कुछ पत्तों के झड़ जाने से कभी पेड़ नहीं सूखता.
क्योंकि अच्छा इन्सान अच्छा समय ला सकता है, लेकिन अच्छा समय अच्छा इन्सान नहीं ला सकता.
अच्छे समय से ज्यादा अच्छे इन्सान के साथ रिश्ता रखो.
तू रोज़ ढूँढ़ता है खुद को मेरे अल्फाज़ों मे..
आ लिख दूँ कुछ तेरे बारे में, मुझे पता है कि,