मस्त विचार 694
वरना जीत की क्या औकात,जो हमें ठुकरा दे….
वो मंजिल ही बदनसीब थी, जो हम पा न सके….
वरना जीत की क्या औकात,जो हमें ठुकरा दे….
वो मंजिल ही बदनसीब थी, जो हम पा न सके….
सुख ही सुख दुँगी तुम्हे ….ये कह कर मुकर गई जिन्दगी.
_ लेकिन काम से मिली पहचान जिन्दगी भर रहती है.
रात हो या उम्र, एक ना एक दिन कट ही जाएगी.
पतंग सी हैं जिंदगी, कहाँ तक जाएगी,
सच है दुनिया वालो की हम हैँ अनाड़ी…
सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी….