मस्त विचार 704
लोग वही सुनते है, जो वे सुनना चाहते हैं…
लोग वही सुनते है, जो वे सुनना चाहते हैं…
ना ही कोई खुशी, उतनी स्थायी.
समय के हाथों, पर मै बेचारा नहीं हूँ. अकेला हूँ, तनहा हूँ. लेकिन तनहाइयों से डरा नहीं हूँ. मै थक जरूर गया हूँ दोस्तों, पर अभी तक हारा नहीं हूँ. मै फिर उठ खड़ा हुआ हूँ दोस्तों, जिन्दा हूँ, अभी तक मरा नहीं हूँ.
एक नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है !
पर चुप इसलिये हूँ कि जो दिया तू ने वो भी बहुतों को नसीब भी नही होता.
गीत तेरा हर वक़्त गाने लगा हूँ, तू मिल गया है सारा आलम महका, झूमते झूमते खुद पे इतराने लगा हूँ,