मस्त विचार 762
किसी इन्सान को अपने जैसा बनाने के लिए दबाव न डालें.
उन्हें वैसे ही अपनाएँ, जैसे वे हैं.
एक- दूसरे की पसन्द को सम्मान देंगे तो हम ज्यादा खुश रहेंगे.
मन- मस्तिष्क में उमड़- घुमड़ कर ही शांत नहीं होते, वे हम से वैसे ही गंदे एवं निरुपयोगी काम भी करा डालते हैं. भले इस से बाद में हमें शर्मिंदगी उठानी पड़े.
गंदे एवं निरुपयोगी विचार……..
ग़लतफ़हमी में पैदा होने वाले सवालों का जवाब खुद ही बना लेता है.
रिश्तों की डोरी तब कमजोर होती है, जब इंसान
सारे आँसू दूर हो गए, ये तेरी ही बदौलत है ऐ मेरे यार, हम काँच से कोई कोहिनूर हो गए.
तेरी हँसी मे हँसे तो
_ बल्कि समय पर न उठना शर्म की बात है..
वरना आँचल और कफ़न एक ही धागे से बनते है.
सिर्फ एक एहसास करने का अंदाज़ बदल जाया करते है,