| Apr 19, 2015 | मस्त विचार
एक कुम्हार माटी से चिलम बनाने जा रहा था।
उसने चिलम को आकार दिया।
थोड़ी देर में उसने चिलम को बिगाड़ दिया l
माटी ने पूछा – अरे कुम्हार, तुमने चिलम अच्छी
बनाई फिर
बिगाड़ क्यों दिया.?
कुम्हार ने कहा कि- अरी माटी, पहले मैं चिलम
बनाने की
सोच रहा था, किन्तु मेरी मति (दिमाग) बदली
और अब मैं
सुराही या फिर घड़ा बनाऊंगा।
.
ये सुनकर माटी बोली- रे कुम्हार, तेरी तो मति
बदली,
मेरी तो जिंदगी ही बदल गयी…l
चिलम बनती तो स्वयं भी जलती और दूसरों को
भी
जलाती…. अब सुराही बनूँगी तो स्वयं भी
शीतल रहूँगी …
और दूसरों को भी शीतल रखूंगी…
“यदि जीवन में हम सभी सही फैसला लें… तो हम
स्वयं भी
खुश रहेंगे.. एवं दूसरों को भी खुशियाँ दे सकेंगे.
| Apr 19, 2015 | मस्त विचार
जब होता हूँ अकेला, लफ्जों की महफ़िल सजाता हूँ.
तेरे मेरे एहसास घोल कर एक नई गजल बनता हूँ.
| Apr 19, 2015 | मस्त विचार
इन्सान मकान बदलता है, वस्त्र बदलता है, सम्बन्ध बदलता है, फिर भी दुःखी रहता है-
क्यूँकि वह अपना स्वभाव नहीं बदलता.
| Apr 18, 2015 | मस्त विचार
बनावटी लोगों से संभल कर रहना,
पहले रो- रोकर आपके दुःख दर्द पूछेंगे,
फिर हंस हंस के जमाने वालों को बताएंगे.
| Apr 18, 2015 | मस्त विचार
ज़िंदगी में जब मुसीबत आये, तब सम्भव हो तो किसी से मदद मत मांगना.
क्योंकि मुसीबत चार दिन की और एहसान ज़िंदगी भर का.
| Apr 18, 2015 | मस्त विचार
दुनिया में कोई भी व्यक्ति अशान्त रहना नहीं चाहता,
मगर फिर भी अशान्ति वाले कार्य करने से बाज नहीं आता.