मस्त विचार 680
इस संसार में जिस को भी ये आ गया , वो बिना किसी आवाज के बुलंदीयो पर पहुँच जाता है.
चुप रहना भी एक कला है ,
इस संसार में जिस को भी ये आ गया , वो बिना किसी आवाज के बुलंदीयो पर पहुँच जाता है.
चुप रहना भी एक कला है ,
ज़िन्दगी में टेंशन किस को कम है.. अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है.. जिन्दगी का नाम ही कभी ख़ुशी कभी गम है.
बिंदास मुस्कुराओ क्या ग़म है ,..
तभी तो मामले सुलझते ‘कम’ उलझते ‘ज्यादा’ हैं..
आजकल लोग समझते ‘कम’ और समझाते ‘ज्यादा’ हैं,
जो लोग मेरे हारने की वजह से पहली बार जीते हों.
पसंद है मुझे….. उन लोगों से हारना…
अपनी विशिष्टता का सम्मान करें, और तुलना छोड़ें ; _ अपने अस्तित्व में मस्त रहो.