मस्त विचार 732

लाख टके की बात

“बेरंग है पानी फिर भी…जिन्दगी कहलाता है,

ढेर सारे रंग हैं शराब के…,फिर भी गन्दगी कहलाता है.

लोग भी कमाल करते हैं…जिन्दगी के गम भुलाने के लिये,

गन्दगी में…जिन्दगी मिलाकर पीते हैं.

मस्त विचार 729

नज़र चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है प्यार करना,

क्या बताएं इस दिलका आलम, नसीब मैं लिखा है इंतज़ार करना..

मस्त विचार 728

ये तुझे भी पता है कि मुझे भी पता है.

ये मुझे भी पता है कि तुझे क्या पता है.

तेरे पते को और मेरे पते को,

ये भी पता है कि क्या क्या पता है.

मस्त विचार 727

समस्या” के बारे में सोचने से, बहाने मिलते हैं,

“समाधान” के बारे में सोचने पर रास्ते मिलते हैं…

 

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