मस्त विचार 4690
ये मेरी काग़ज़ी कश्ती है और ये मैं हूँ,
ख़बर नहीं कि समुंदर का फ़ैसला क्या है..
ख़बर नहीं कि समुंदर का फ़ैसला क्या है..
तुम सिर्फ कहते रहो, हम कर के दिखलाएँगे…!!!
जिससे जिंदगी का कोई भी अंधेरा रोशन किया जा सकता है..
सिर्फ़ पाँववालों की दौड़ शेष हो जाती है..
पँखों को खोल जमाना सिर्फ उड़ान देखता है !!
देख तुझ पर ना कहीं… वक्त बुरा आ जाये.