मस्त विचार 4642
कुछ तकदीर हार गई, कुछ सपने टूट गये..
कुछ गैरों ने बर्बाद किया, कुछ अपने छोड़ गये…
कुछ गैरों ने बर्बाद किया, कुछ अपने छोड़ गये…
मसला खुद खुश रहकर तुझे खुश रखने का,
इसलिए तेरे सामने हम रो भी नहीं सकते…….
क्यूँ न हम शीशे से कह दें…टूटा न करें !”
तुम पर नजर पड़ी और गुमराह हो गये..!!!
जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का..
_ जो छोड़ना सीख गया, वही नए साल को सच में जी पाता है.