मस्त विचार 4860
पोंछ लो अश्क _ अपनी आँखों से,_
_ कौन रहना पसंद करता है _ टपकते हुए मकानों मेँ..
_ कौन रहना पसंद करता है _ टपकते हुए मकानों मेँ..
_ इतना संभाल कर मुस्कुराते हैं हम..
_ तेरे दर्द से, मुझे भी दर्द होता है !
कुछ अधूरी ख्वाहिशें ही तो …जिंदगी जीने का मजा देती हैं..