मस्त विचार 4706
ज़िन्दगी का साज़ भी क्या साज़ है…
बज तो रहा है मगर ….फिर भी बेआवाज़ है….
बज तो रहा है मगर ….फिर भी बेआवाज़ है….
रोज नही तो उस पल हम याद तुम्हे आएंगे..
गर वो रोये तो उन्हे कौन हंसाता होगा।!!
कि बात किसी से भी करूँ…. ख्याल तेरा ही आता है ….!!
न कोई साथ मिला ना ही कोई कारवाँ बना..
वह अकेले कैसे जीता होगा.. यही सोच कर सिहर जाता हूँ…!!