मस्त विचार 646
कठिनाई हार गई मुझ से, पर मै तो ना बिलकुल बिखरा. पैसों की भी देखी तंगी, बीमारी भी आई नंगी. मै झेल गया विपदा सारी, पर ना मैंने हिम्मत हारी. ना इन सबने लाचार किया, मैंने हर सपना साकार किया. जीवन जीने की शैली को, मैंने एक नया आकार दिया.
कठिनाई हार गई मुझ से, पर मै तो ना बिलकुल बिखरा. पैसों की भी देखी तंगी, बीमारी भी आई नंगी. मै झेल गया विपदा सारी, पर ना मैंने हिम्मत हारी. ना इन सबने लाचार किया, मैंने हर सपना साकार किया. जीवन जीने की शैली को, मैंने एक नया आकार दिया.
……आँख खुले तो सामने तू नजर आए.
ना मिला तू, तो मै थक कर आ गया घर में, घर में कदम रखते ही, लगा मेरे पीछे ही आ गया तू, मिला तू मुझे मेरे ही में, मै शायद भूल गया और बेवजह निकल पड़ा बाहर, तू मिल गया मुझे मेरे ही में .
जिन्दगी को परवाज कर दो.
फिर खुशियाँ सब साथ होगी, मंजिल भी तुम्हारे पास होगी.
और हम पागल उनकी मर्ज़ी का इंतज़ार करते हैं .!!
क्यों कि……. जिन के पास खुद इज्जत नहीं….. वो किसी और को क्या इज्जत देंगे.