मस्त विचार 714
कि एक मुद्दत से ढूंढ़ रहा हूँ कसूर अपना…!!
कि एक मुद्दत से ढूंढ़ रहा हूँ कसूर अपना…!!
माफ़ कर देने का आनन्द, ज़िन्दगी भर रहेगा.
लेकिन……बेइज्जती हमेशा नाप तोल कर करना, क्यों कि ये वो उधार है जो हर कोई ब्याज सहित चुकाने के लिए मरा जाता है.
गम में भी मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया !! आप भी शामिल हैं उन गिनती के लोगों में ! जिन्होंने हमें काँच से कोहिनूर कर दिया !!
और एक नसीब है जो …. ना जाने कब से सो रहा…..”
कोई टूट कर बिखर गया, कोई हंस कर चल दिया।।