मस्त विचार 635
बस रुकना नहीं चाहता……………….
बस रुकना नहीं चाहता……………….
जो मुफ्त में है बख्शी वो शय है माशाअल्लाह…
तूने जो आँखे बख्शी है नूर ज़िन्दगी का
है आँखों से ही जिन्दा सरूर ज़िन्दगी का…।
गर आँख ही न होती तो फिर भला क्या होता
मैं बोझ ढोता फिरता मजबूर ज़िन्दगी का….।
जो हाथ तूने बख्शे है लाजवाब मौला
है इनकी मेहरबानी हूँ कामयाब मौला….
दुनिया में नही दिखता इनका जवाब मौला
देखूं इन्हें तो होता तूं बेनकाब मौला…..।
मैं अपनी मंजिलो से ताउम्र गैर होता
तूने दिया न मुझको गर दोस्त पैर होता…
ये साथ हर मुश्किल में होता नही जुदा है
तूं वाकई मौला है तूं वाकई खुदा है……।
इस जिस्म जैसा तोहफा दिखता नही है मौला
बख्शा है मुफ्त वर्ना बिकता नही है मौला…..।
है शक्ल तेरी मौला है अक्ल तेरी मौला
मेरी तमाम खुशियां है नक्ल तेरी मौला…….
*पंछी*
मजिल मिलती नहीं राह पर रुक जाने से भरोसा रखना खुद पर और उस रब पर सब कुछ देता है वो सही वक्त आने पर…
आंसूओ को भी हमने गिरने ना दिया, आंखे तो रोज भर आती है तेरी याद मे, पर तेरी दी हुई कसम ने हमे रोने ना दिया,….
_ दौलत से साधन तो खरीदे जा सकते है पर खुशी नही.!!
_ परेशाँ करने वालों की परेशानी नहीं जाती.!!
वो चलती तो है, पर कुछ सिलती नहीं…
इसी तरह रिश्तों में प्यार नहीं डालोगे,
तो ज़िन्दगी चलेगी ज़रूर, पर रिश्तों को जोड़ नहीं पायेगी.