मस्त विचार 605
और जो बिखर कर निखर जाए वो व्यक्तित्व है.
और जो बिखर कर निखर जाए वो व्यक्तित्व है.
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है… शिकवे कितने भी हो हर पल, फिर भी हँसते रहना… क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है, बस एक ही बार मिलती है.
यहाँ से # जिन्दा बचकर # कोई नही जायेगा.
जिन्हें साथ नहीं चलना है वो अक्सर रूठ जाया करते हैं.
मगर…..बदलने वाले बदल ही जाते हैं….!!
जो सफ़र की धूल को गुलाल समझता है…!!!
“हर. शख्स. के अपने. अफसाने. हैं “ जो सामने. हैं. उसे लोग. बुरा कहते. हैं, जिसको. देखा. नहीं उसे सब “खुदा”. कहते. है….