मस्त विचार 684
अच्छी किताब और सच्चे दोस्त….तुरंत समझ नहीं आते.
अच्छी किताब और सच्चे दोस्त….तुरंत समझ नहीं आते.
रिश्तें निभाना बडा नाजुक सा हुनर होता है !!
नर्म लफ्जों से भी लग जाती है चोटें अक्सर !
कभी खुद का वक्त नहीं देखता है, और सदा उन से वफ़ादार रहिये जो व्यस्त होने के बावजूद भी आप के लिए वक़्त निकालता है.
सदा उन के कर्जदार रहिये जो आप के लिए
मैं परेशान हूँ ये सोच कर, कि फिर ये “झूठ” बोलता कौन है”.
इस दुनियाँ के हर शख्स को नफरत है “झूठ” से…
इस संसार में जिस को भी ये आ गया , वो बिना किसी आवाज के बुलंदीयो पर पहुँच जाता है.
चुप रहना भी एक कला है ,