मस्त विचार 551
एक बन्दे ने पूछा क्या है ” जिन्दगी “
दूसरे बन्दे ने खूबसूरत जवाब दिया …..
ना सुख जिन्दगी ,
ना दुख जिन्दगी ,
ना गम जिन्दगी ,
ना खुशी जिन्दगी ,
अपने -अपने कर्मों का हिसाब है जिन्दगी !!
दूसरे बन्दे ने खूबसूरत जवाब दिया …..
ना सुख जिन्दगी ,
ना दुख जिन्दगी ,
ना गम जिन्दगी ,
ना खुशी जिन्दगी ,
अपने -अपने कर्मों का हिसाब है जिन्दगी !!
इंसान खुद रो पड़ता है अकेले मे
किसी को हौँसला देने के बाद.
_ लेकिन हमें समझाने के लिए नहीं बल्कि हमारी सोच बदलने के लिए..
कोई रिश्ता सा इनसे भी नज़र आए,
मेरा कुछ था, मगर वो कुछ भी न था
रास्ता, वो जो रोज़ मेरे घर को जाए….
मैं जीवित हूँ उस तरीके से जीने के लिए…
जो मुझे खुश बनाता है.
मगर एक खूबी भी है…”मैं किसी से रिश्ता मतलब के लिए नही रखता.”