मस्त विचार 625
खबर ही ना थी कि तुम मेरी रूह में समाये हुए हो.
खबर ही ना थी कि तुम मेरी रूह में समाये हुए हो.
यार मेरे हम और करीब आ जाएँ तो अच्छा है. जमाने की परवाह करेंगे तो जी न पाएंगे. आ जाओ यह रिश्ता हम निभाएं तो अच्छा है.
उन के लिए ख़राब समय कभी भी आ सकता है.
सुख दुःख को छक कर पीना सीख जाएँ, आए संकट नहीं घबराएँ, मस्त हो कर जीना हम सीख जाएँ.
यहाँ तो हर कोई वफा की उम्मीद दे कर बेवफाई कर जाता है.
अगर उसे “समझना” है तो उसे “बोलने” दो….!!!”