मस्त विचार 619
सुकून ढूंढने चले थे और नींद ही गँवा बैठे.
अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफ़िला ज़िन्दगी का,
सुकून ढूंढने चले थे और नींद ही गँवा बैठे.
अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफ़िला ज़िन्दगी का,
ज़िन्दगी में बहुत सबेरे हैं, और थोड़े से बस अँधेरे हैं.
किस लिए गम तेरे घनेरे हैं, मुस्कुराने से किस ने रोका है,
वर्ना – दुनिया में सब कुछ पाने के लिए प्यार ही काफी है.
हर मुश्किलें अपना हल खुद ढूंढ लेती हैं.
हर कोई उसकी खूबसूरती को जुदा अन्दाज में बख़ान करता है.