मस्त विचार 533

अक्सर हम दूसरे की एक गलती के आगे उस की हजार अच्छाइयाँ भूल जाते है. याद करें, जिस व्यक्ति ने आप को चोट पहुंचाई है, पहले कई दफा, वह आप के काम भी आया होगा. तो क्या वह छमा का अधिकारी नहीं ?

मस्त विचार 532

नदिया चले, चले रे धारा, चंदा चले चले रे तारा

तुझकाे चलना हाेगा, तुझकाे चलना हाेगा,

जीवन कही भी ठहरता नही है

आंधी से तूफा, से डरता नही है

तू ना चलेगा ताे चले तेरी राहे

मंजिल काे तरसेगी तेरी निगाहें

तुझकाे चलना हाेगा…?

मस्त विचार 530

दुनिया टूटते हुए तारे से भी दुआ मांगती है…..

कौन कहता है बर्बादी किसी के काम नहीं आती…….

मस्त विचार – कायम रखो दिल मेँ धैर्य सुकून – 529

कायम रखो दिल मेँ धैर्य सुकून, चढ न जाये स्वार्थ का जुनून.
_ ईर्ष्या – द्वेष हैँ मीठे जहर, बचके रहना आठोँ पहर.
_ मन मेँ संजो लो मीठे सपने, अजनबी बन जाएंगे अपने.
_ घृणा की काट दो बेल बना रहेगा तालमेल.
_ सच्ची धारणा और पक्का विश्वास उन्नति के सोपान हैँ.
_ मत दिखाओ झूठी औकात, सब मेँ बाँटो खुशियोँ की सौगात.
_ सबकी उन्नति मेँ अपनी उन्नति, करते रहो इसी का गुणगान..
_ कण-कण मेँ आन्नद अपार, हर दिन रहेगी बसन्त बहार.!!
मैं हर समय उपलब्ध नहीं रहता.. खासकर उनके लिए तो बिल्कुल नहीं, जो मेरा ऊर्जा तो सोख लेते हैं.. पर बदले में न लिहाज़ देते हैं, न अपनापन, ​

_ दुनिया कहता है कि हम साथ निभाएंगे, मगर सच तो यह है.. मैं बस वहाँ से खामोशी से निकल जाता हूँ.. जहाँ बने रहने की कीमत खुद को खोना हो,
​_ जो मुझे करीब से जानते हैं, वे मेरा सॉफ्टनेस और साथ निभाने का हुनर जानते हैं लेकिन जिस पल मेरी इस सॉफ्टनेस को कमज़ोरी समझा गया, मैं अपने कदम पीछे खींच लेता हूँ,
​_ मैं कोई महात्मा नहीं हूँ, मुझे गुस्सा भी आता है और चोट भी लगती है, पर मैं अपना हिफाज़त करना जानता हूं,
_ मुझे पता है मैं क्या डिज़र्व करता हूँ और यह भी..कि मेरे अपने कौन हैं, मुझसे खुशामद नहीं होता, मेरे शब्द सीधे हैं और सम्मान मेरा स्वभाव..
_ इसलिए जब किसी का लहजा बदलने लगे और नज़रें बोझ जैसे हो जाएँ,
तो मैं अपने सुकून के लिए एक सेफ दूरी चुन लेता हूँ,
​_ मैं छोड़ देता हूँ, क्योंकि मैं जानता हूँ, कहाँ ठहर कर इंतज़ार करना है और कहाँ से मुड़कर दोबारा नहीं देखना..!!
– Tanveer

मस्त विचार 528

एक शब्द है ( प्यार ) इसे कर के देखो तुम, तड़प ना जाओ तो कहना,

एक शब्द है ( क़िस्मत ), इससे लड़ कर देखो तुम, हार ना जाओ तो कहना,

एक शब्द है (ईमानदारी ), जमाने में नहीं मिलती, कहीं ढूंढ पाओ तो कहना,

एक शब्द है ( आँसू ) दिल में छुपा कर रखो, तुम्हारी आँखों से ना निकल जाए तो कहना,

एक शब्द है ( बिछड़ना ) इसे सह कर तो देखो, तुम टूट कर बिखर ना जाओ तो कहना,

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