मस्त विचार 555

स्वागत करने को तेरा,

हम ने पलकों को बिछाया है.

याद में तेरी आंसू को बहाया है.

हमें मालूम है आदत तेरी

हौले से

हमारी ओर कदम बढ़ाते हो,

ज्ञान की मस्ती बरसाते हो

चले जाते हो.

तेरे क़दमों की चाप को,हम महसूस करते हैं.

ऎसा सजाया है तुम को इस बार

आ गए हो एक बार

तो फिर

जाने ही तुम को नहीं देंगे.

मस्त विचार 554

हमने उदासियों में गुजारी है ज़िन्दगी-

लगता है डर फ़रेब-ए-वफ़ा से कभी कभी-

ऐसा न हो कि ज़ख्म कोई फिर नया मिले-

अब तक तो जो भी दोस्त मिले बेवफ़ा मिले.

मस्त विचार 551

एक बन्दे ने पूछा क्या है ” जिन्दगी “

दूसरे बन्दे ने खूबसूरत जवाब दिया …..

ना सुख जिन्दगी ,

ना दुख जिन्दगी ,

ना गम जिन्दगी ,

ना खुशी जिन्दगी ,

अपने -अपने कर्मों का हिसाब है जिन्दगी !!

मस्त विचार 550

जिँदगी की राहो पर कभी यूँ भी होता है.

इंसान खुद रो पड़ता है अकेले मे

किसी को हौँसला देने के बाद.

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