मस्त विचार 543
बच न सका इश्क के तक़ाज़ों से खुदा भी…
इक महबूब की खातिर सारी दुनिया बना डाली…….
इक महबूब की खातिर सारी दुनिया बना डाली…….
तो वो हंसकर बोले जिंदगी का कोई भरोसा नही होता.
अपने बहुआयामी व्यक्तित्व को पहचानें,
खुद को अपनी खूबियों और खामियों के साथ अपनायें.
_ किसी की कहानी में शायद मैं भी गलत हूँ !!
इसलिए ज़िन्दगी जैसे मिले, उसे उसी तरह से जीना सीख लो.
मैंने भी मेले में ……. बहुत तालियाँ बजाई हैं ” !!