मस्त विचार 515
इंसान ना कुछ हंसकर सीखता है
ना कुछ रोकर सीखता है
जब भी कुछ अलग सीखता है तो,
या तो किसी का होकर सीखता है…
या फिर किसी को खोकर सीखता है…
ना कुछ रोकर सीखता है
जब भी कुछ अलग सीखता है तो,
या तो किसी का होकर सीखता है…
या फिर किसी को खोकर सीखता है…
मेरी रगो में जहर जुदाई का उतरता देखो….
किस – किस अदा से तुझे माँगा है,
आओ कभी सजदो में मुझे सिसकता देखो….
हमारा नजरिया जैसा होगा, हम खुद के बारे में वही सोचेंगे.
क्योंकि जब वो नीचे आएगा, अपना फैसला खुद सुनाएगा..
हर दोपहर नए दर्द से नजरें चार होता हूँ.
शाम को गहराती है दर्दे यारी..
फिर नयी सुबह के इन्तज़ार में होता हूँ.