मस्त विचार 527

हमारे आस पास नकारात्मक और दोषदर्शी लोग हमेशा मौजूद रहेंगे. यदि हम उनकी बातों को सुन कर, डर कर बैठ जाएंगे, तो काम कैसे चलेगा. लोगों की बातें या भविष्य वाणी सुन कर, हार मान लेना, बिना परीछा दिए ही फेल हो जाने जैसा है. ऎसी बातों को अनसुना कर अपने काम में जुट जाएं — भविष्य वाणियों के हवाले न करें, अपनी काबिलियत.

मस्त विचार 526

हम खुद पर गरूर नहीं करते,

याद करने के लिए किसी को मजबूर नहीं करते,

मगर एक बार किसी को अपना बना लें तो,

उसे अपने से कभी दूर नहीं करते.

मस्त विचार 525

जब तक हम दूसरों के बारे में नहीं सोचते है और उनके लिए कुछ नहीं करते हैं,

तब तक हम खुशियों के सबसे बड़े स्त्रोत को गँवाते रहते हैं.

मस्त विचार 524

हम कुछ आदमियों से इसलिए घृणा करते है कि, हम उन के बारे में पूरी तरह नहीं जानते और कभी जान भी नहीं सकेंगे,

क्योंकि उन से हम घृणा करते हैं.

मस्त विचार 523

जीवन तो खाली किताब है, कोरा पन्ना है.

कोरा पन्ना न सार्थक होता न व्यर्थ होता, सिर्फ खाली होता है –

– उस पर क्या लिखोगे, सब इस पर निर्भर करता है.

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