मस्त विचार 589

आइना और परछाई के जैसे मित्र रखो,

क्योंकि आइना कभी झूठ नही बोलता और परछाई कभी साथ नही छोङती.

मस्त विचार 586

तू छोड दे कोशिशें इंसानो को पहचानने की…..।

यहाँ जरूरत के हिसाब से सब बदलतें नकाब है …..।

अपने गुनाहों पर सौ पर्दे डालकर हर शख्स कहता हैं…….।

ज़माना बङा ख़राब हैं……।।

मस्त विचार 585

जीवन से नाराजगी कैसी ?

इस से रुठने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए.

जीवन में दुःख के बाद सुख का महत्व दोगुना हो जाता है.

मस्त विचार 584

मिट्टी में ही होती है पकड़ मजबूत पैरों की।..

संगमरमर पर अक्सर मैंने लोगो को फिसलते देखा है!!

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