मस्त विचार 577
परखता तो वक्त है,
कभी हालात के रूप मे, कभी मजबूरीयों के रूप मे.
कभी हालात के रूप मे, कभी मजबूरीयों के रूप मे.
अब जो याद करेगा, सिर्फ वही याद रहेगा.
और जो मन से उतर जाते हैं उन से सम्भल के रहिये.
उस व्यक्ति का जीवन सुखकारी नहीं हो सकता.
देख सब कुछ है मेरे पास, बस एक तु ही नहीं ….
इतनी ठोकरों के बाद भी ये सीधा कैसे चलता है.