मस्त विचार 569

जिसको जितनी जरूरत थी, उतना मेरे साथ चला.

मैं ले के चला था काफिला, शाम होते होते अकेला मिला.

मस्त विचार 567

दोस्ती कभी कोई खोज नही होती,

ये हर किसी से हर रोज नही होती,

ज़िन्दगी में हमारी मौंजूदगी को

बेवजह मत समझना,

पलकें कभी आखों पे बोझ नही होती.

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