मस्त विचार 507
तुम जीवन को जीना सीखाते हो.
सुख- दुःख की कड़ी को मिलाते हो.
हम जीयें ज़िन्दगी मस्तों की तरह.
ऐसी मस्ती तुम ही लाते हो.
सुख- दुःख की कड़ी को मिलाते हो.
हम जीयें ज़िन्दगी मस्तों की तरह.
ऐसी मस्ती तुम ही लाते हो.
……………………ज़िन्दगी से जंग जारी है.
दर्द में डूबे गीत न दे, गम का सिसकता साज़ न दे.
तेरा एक एहसास आए तो सब सर्द हो जाये…
मुझे सरफरोशी से मोह्ब्बत इतनी हो गयी है,
दर्द भी मेरे आगोश में आकर बेदर्द हो जाये…..
तो ज़माने को बताने से पहले, एक बार हमें जरूर बता देना.
वर्ना हम गरीबों का नवाबो से ताल्लुक कैसा………