मस्त विचार 480
किया क्या तू ने ? असर हुआ इतना गहरा.
जीने की मेरी ख्वाहिशें . कुछ और बढ़ गईं.
जीने की मेरी ख्वाहिशें . कुछ और बढ़ गईं.
ये साफ़- सुथरी ज़िन्दगी, उस मिट्टी से भी ज्यादा गन्दी है.
कि वापिस भी लेने पड़ें तो खुद को कड़वे न लगें.
लोग “रूलाना” नहीं छोडते…और ज़िंदादिल “हंसना” नहीं छोडते…
आप जो भी काम करते हैं, उसके बारे में अच्छा सोचें. उस काम का बेहतरीन पहलू तलाशें, पता लगाएँ कि उस मे आप की भूमिका कितनी बड़ी है — अपने काम को हम खुद महत्वपूर्ण बनाते हैं.
इधर- उधर से सुनी- सुनाई बातों को दूसरों तक पहुँचाने में अपना समय व्यर्थ न गंवाए . इस से आप की इमेज कानाफूसी करने वाले व्यक्ति की बन जाती है .