मस्त विचार 495

क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है,

हंसती- खेलती ज़िन्दगी आम हो जाती है,

एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम,

आज बिना मुस्कुराये ही……………….

………………………….शाम हो जाती है.

मस्त विचार 493

हमने कभी दोस्ती को जाना ना होता,

गर हमारी ज़िंदगी मे आपका आना ना होता,

यूँ ही गुजार देते ज़िंदगी को

अगर आपको अपना प्यारा दोस्त माना ना होता.

मस्त विचार 491

जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, उस गड्ढे में वह खुद ही गिरता है.

बेहतर है कि ऎसी हरकतों से बाज़ आयें.

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