मस्त विचार 553
उनसे कहना की क़िस्मत पे इतना नाज ना करे,
हमने बारिश में भी जलते मकान देखे हैं.
हमने बारिश में भी जलते मकान देखे हैं.
ये तो है वक़्त के हाथों में खिलौने जैसी………
दूसरे बन्दे ने खूबसूरत जवाब दिया …..
ना सुख जिन्दगी ,
ना दुख जिन्दगी ,
ना गम जिन्दगी ,
ना खुशी जिन्दगी ,
अपने -अपने कर्मों का हिसाब है जिन्दगी !!
इंसान खुद रो पड़ता है अकेले मे
किसी को हौँसला देने के बाद.
_ लेकिन हमें समझाने के लिए नहीं बल्कि हमारी सोच बदलने के लिए..
कोई रिश्ता सा इनसे भी नज़र आए,
मेरा कुछ था, मगर वो कुछ भी न था
रास्ता, वो जो रोज़ मेरे घर को जाए….