मस्त विचार 551

एक बन्दे ने पूछा क्या है ” जिन्दगी “

दूसरे बन्दे ने खूबसूरत जवाब दिया …..

ना सुख जिन्दगी ,

ना दुख जिन्दगी ,

ना गम जिन्दगी ,

ना खुशी जिन्दगी ,

अपने -अपने कर्मों का हिसाब है जिन्दगी !!

मस्त विचार 550

जिँदगी की राहो पर कभी यूँ भी होता है.

इंसान खुद रो पड़ता है अकेले मे

किसी को हौँसला देने के बाद.

मस्त विचार 549

जिन्दगी हमें हमेशा नया पाठ पढ़ाती है, _

_ लेकिन हमें समझाने के लिए नहीं बल्कि हमारी सोच बदलने के लिए..

मस्त विचार 548

शहर की सड़को को गौर से देखा जाए

कोई रिश्ता सा इनसे भी नज़र आए,

मेरा कुछ था, मगर वो कुछ भी न था

रास्ता, वो जो रोज़ मेरे घर को जाए….

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