मस्त विचार 462
हर हादसे के बाद मैं कुछ टूटता गया…..
मेरा वजूद जैसे किनारा नदी का था…….
मेरा वजूद जैसे किनारा नदी का था…….
गुलशन में हमीं, लेकिन खुशबू को तरसते है…….
_ और दुख का कोई खरीदार नहीं होता !!
लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता कि
वे क्या बदल सकते हैं —
—मैंने अपने जीवन को बदला है.
_ क्योंकि वक़्त नहीं लगता, लोगों को अब, किसी के दर्द का मज़ाक बनाने में ..
_ दर्द सिर्फ़ अपने होते हैं, दिल में रखने पड़ते हैं ..