मस्त विचार 483
गर्दिशे वक़्त जब भी आता है, अपना साया भी रूठ जाता है.
ऐसी हालत में मदद को मेरी, देखना है अब कौन आता है.
ऐसी हालत में मदद को मेरी, देखना है अब कौन आता है.
अब कोई वजह नही मिलती मुस्कुराने की..
फिर क्यों नहीं सब पे विश्वास होता हैं !!
इंसान चाहे कितनो भी आम हो….!
वो किसी न किसी के लिए जरुर खास होता हैं !!
जीने की मेरी ख्वाहिशें . कुछ और बढ़ गईं.
ये साफ़- सुथरी ज़िन्दगी, उस मिट्टी से भी ज्यादा गन्दी है.
कि वापिस भी लेने पड़ें तो खुद को कड़वे न लगें.