मस्त विचार 456
बहुत मुश्किल के बाद पत्थर का बना हूँ,
मैं जीना चाहता हूँ यारो मुझे मोम ना करो !!
मैं जीना चाहता हूँ यारो मुझे मोम ना करो !!
जब प्यार और नफरत दोनों अनुपस्थित होते हैं तो सब कुछ स्पष्ट और निर्विवाद हो जाता है.
गिन गिन के जैसे ली हो ख़ुशी हर किसी से हमने.
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है….!!
स्वयं की खोज करें, _ अन्यथा आपको अन्य लोगों की राय पर निर्भर रहना होगा जो खुद को भी नहीं जानते हैं.
और हम उसकी ग़लती के बारे में सब को जाकर बता दें.
हमेशा इस बात का इन्तजार बन्द करें कि कोई ग़लती करे