मस्त विचार 524

हम कुछ आदमियों से इसलिए घृणा करते है कि, हम उन के बारे में पूरी तरह नहीं जानते और कभी जान भी नहीं सकेंगे,

क्योंकि उन से हम घृणा करते हैं.

मस्त विचार 523

जीवन तो खाली किताब है, कोरा पन्ना है.

कोरा पन्ना न सार्थक होता न व्यर्थ होता, सिर्फ खाली होता है –

– उस पर क्या लिखोगे, सब इस पर निर्भर करता है.

मस्त विचार 520

कुछ फ़ासले ऐसे भी होते हैं ….जनाब, जो तय तो नहीं होते,

मगर… नज़दीकियाँ कमाल की रखते हैं.

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