मस्त विचार 464

मंज़िलें तो बहुत हैं पर कोई साथ नहीं,

वीरानों में भटकना ही मेरी ज़िन्दगी है,

लगता है जैसे किसी को मेरी जरुरत नहीं,

मंज़िलें तो बहुत है पर कोई साथ नहीं.

मस्त विचार 463

जरा सा पैर क्या फिसला _ इल्जाम उसी चप्पल पर लगाया सबने.

महीनों तपती जमीन और कांटों से _ बचाया था जिसने…

मस्त विचार 459

ज्यादातर लोग जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं,

लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता कि

वे क्या बदल सकते हैं —

—मैंने अपने जीवन को बदला है.

error: Content is protected