मस्त विचार 360
पास रह कर ही कोई रिश्ता ख़ास नहीं होता.
तुम इतने मेरे पास हो कि ,
दूरियों का एहसास नहीं होता.
पास रह कर ही कोई रिश्ता ख़ास नहीं होता.
तुम इतने मेरे पास हो कि ,
दूरियों का एहसास नहीं होता.
मुझ से कोई मुझ सा नहीं देखा जाता………..
क्यूँ उदास रहता हूँ.
क्यूँ समस्याओं से उलझा हूँ.
मेरा तो काम है चलना.
शायद ये भूल जाता हूँ कि
राहों से निकलती हैं राहें.
अभी तो मुझे कई मंजिलों को तय करना है.
अभी तो जीवन में और सफर करना है.
पहले भी जब सफर पे निकला था.
तू ने ही मुझे मंजिल तक पहुँचाया था.
ऐ यार, फिर भी उदास तथा दुविधाओं में क्यूँ हूँ ?
सोना नरम होकर जेवर बन जाता है !
मिट्टी नरम होकर खेत बन जाती है,
आटा नरम होता है तो रोटी बन जाती है !
ठीक इसी तरह अगर इंसान भी…
नरम हो जाये तो लोगो की दिलों में,
अपनी जगह बना लेता है.
बदले वक़्त, पर तुम न बदलना.