मस्त विचार 360

ऐ यार, दूरियां हैं बहुत पर इतना समझ लो.

पास रह कर ही कोई रिश्ता ख़ास नहीं होता.

तुम इतने मेरे पास हो कि ,

दूरियों का एहसास नहीं होता.

मस्त विचार 358

ऐ यार, मैं क्यूँ खामोश रहता हूँ.

क्यूँ उदास रहता हूँ.

क्यूँ समस्याओं से उलझा हूँ.

मेरा तो काम है चलना.

शायद ये भूल जाता हूँ कि

राहों से निकलती हैं राहें.

अभी तो मुझे कई मंजिलों को तय करना है.

अभी तो जीवन में और सफर करना है.

पहले भी जब सफर पे निकला था.

तू ने ही मुझे मंजिल तक पहुँचाया था.

ऐ यार, फिर भी उदास तथा दुविधाओं में क्यूँ हूँ ?

मस्त विचार 356

 लोहा नरम होकर औजार बन जाता है,

सोना नरम होकर जेवर बन जाता है !

मिट्टी नरम होकर खेत बन जाती है,

आटा नरम होता है तो रोटी बन जाती है !

ठीक इसी तरह अगर इंसान भी…

नरम हो जाये तो लोगो की दिलों में,

अपनी जगह बना लेता है.

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