मस्त विचार 387

जिस राह पर..हर बार मुझे अपना कोई छलता रहा,

फिर भी न जाने क्यों मैं उस राह ही चलता रहा !

सोचा बहुत इस बार रोशनी नहीं ..धुआं दूंगा,

लेकिन चिराग था…..फितरत से जलता रहा……जलता ही रहा….

मस्त विचार 386

जीवन में सुख – समृधि , शांति , प्रसनत्ता , उल्लास भरा रहे

और भविष्य को सुखद स्थिति में अनुभव करने लग जाएँ ,

उस स्थिति का नाम सफलता है .

मस्त विचार 384

यूँ ना खींच अपनी तरफ मुझे बेबस कर के…..

ऐसा ना हो के खुद से भी बिछड़ जाऊं और तू भी ना मिले….

मस्त विचार 383

तुझे याद करना भी अब दिल का धड़कना सा बन गया है,

पता ही नहीं ज़िन्दगी साँसों से चल रही है या तेरी यादों से.

मस्त विचार 382

कहाँ-कहाँ से इकट्ठा करूँ, “ऐ ज़िंदगी” तुझको,

जिधर भी देखूँ,,,,,,”तू-ही-तू” बिखरी पड़ी है..

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