मस्त विचार 354

तेरे ग़रूर को देख कर तेरी तमन्ना ही छोड़ दी हमने….

ज़रा हम भी तो देखें कौन चाहता है तुम्हें हमारी तरह…

मस्त विचार 353

गालों पे आंसूओं की लकीर बन गई.

सोचा न था ऐसी तक़दीर बन गई.

हमने तो रेत पे ऊँगली फिराई ही थी,

देखा तो आपकी तसवीर बन गई.

मस्त विचार 350

ज़िन्दगी तेरे ख़्वाब भी कमाल के हैं,

तू, ग़रीबों को उन महलों के सपने दिखाती है,

जिन में अमीरों को नींद नहीं आती…!!

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