मस्त विचार 354
तेरे ग़रूर को देख कर तेरी तमन्ना ही छोड़ दी हमने….
ज़रा हम भी तो देखें कौन चाहता है तुम्हें हमारी तरह…
ज़रा हम भी तो देखें कौन चाहता है तुम्हें हमारी तरह…
सोचा न था ऐसी तक़दीर बन गई.
हमने तो रेत पे ऊँगली फिराई ही थी,
देखा तो आपकी तसवीर बन गई.
तुमसे रौशन ये कौना-कौना है……..
लोग ख़ामोश तो है पर नासमझ नहीं ..!!…
तू, ग़रीबों को उन महलों के सपने दिखाती है,
जिन में अमीरों को नींद नहीं आती…!!
किसी को पाने की यूँ इन्तहा कर दी मैंने……