मस्त विचार 428
जब “दर्द” और “तीखी बोली” , दोनों मीठ्ठी लगने लगे…
तब समझ लीजये , हमे “जीना” आ गया…!!”
तब समझ लीजये , हमे “जीना” आ गया…!!”
बाकी सभी लोग कहानी सुनना पसंद करते हैं..
एक ज़ख्म नहीं भरता, दूसरा आने की ज़िद करता है.
बुरे लोग ही खुद को हर घडी अच्छा दिखाते हैं…!!
अब जीऊंगा सिर्फ उन के लिए …जिनके लिए मैं सब कुछ हुँ ..!
जिसके साथ हम अपना सबकुछ बांट लेना चाहते हैं….