मस्त विचार 367

जब चारों ओर अंधेरा हो, ज्ञान का दीप जला लेना,

जब गमों ने तुमको घेरा हो, तुम हाल *मुरशद* को सुना देना,

जब दुनियाँ तुम से मुँह मोड़े , तुम अपने *मुरशद* को मना लेना,

जब अपने तुमको ठुकरा दे , *मुरशद* के दर को तुम अपना लेना,

जब कोई तुम को रूलाये तो, तुम *मुरशद* के गीत गुनगुना लेना,

*मुरशद* करूणा का सागर है , तुम उसमें डुबकी लगा लेना ,,,,?

आ गया समय जाने का, दुनिया को लुभाने का,

जाने अब कब झूमेंगे मस्ती में,
फिर कब घूमेंगे ज्ञान की कश्ती में,
काश थोड़ा समय और मिल पाता,
थोड़ा और नाचता और गाता.
खुदा मिले या न मिले, पर मेरे मुरशद का साथ मिल गया.
खुदा तो नहीं मिला इन तीन दिनों में,
पर खुदा रूपी मुरशद जरूर मिल गया.
अधूरा हूँ मैं जिसके बिन, उस मुरशद से अब दिल लग गया.
बस अपना प्यार बरसाना, मन में ज्ञान का दीप जलाना.
आए कोई कठिनाई का समय, बस सही राह दिखाना.
अब आपके दिखाए रास्ते पर चलेंगे, थोड़ा गिरेंगे और संभलेंगे.
बस आप ज्ञान रूपी अमृत पिला दो, और मेरी नैया उस पार लगा दो.

मस्त विचार 366

इस दुनिया में कोई न कोई जरूर होता है, जो हमें बिना वजह प्रेम करता है,

कहीं न कहीं जरूर होता है,

हाँ, हम यकीन न कर पायें ये ओर बात है, मगर ऎसा होता है.

मस्त विचार 365

दोस्ती, करो,पर इतना ध्यान रखो,

तुम्हारे दिल के कोने में एक ऐसा, कब्रिसतान होना चाहिए.

जहाँ तुम दोस्तों की गलतियों को दफना सको.

मस्त विचार 364

कहीं हम अपने उस यार को तो नहीं भूल गए.

जो हमारी खुशियों में हमारे साथ नहीं था,

लेकिन बुरे दौर में वह हमारे साथ रहा.

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