मस्त विचार 318
कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के.
ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.
ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया.
आप कब गलत थे………इसे कोई कभी नहीं भूलता.
पसंद के लोग अक्सर बिछड़ते रहते हैं..!…..
फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमें ही उतार दिया.
तेरा हँसता चेहरा उदास क्यूँ है.
तेरी आँखों में प्यास क्यूँ है.
जिस के पास तेरे लिए वक़्त नहीं
वही तेरे लिए ख़ास क्यूँ है.
जो हर मोड़ पे चलना जानता है.
कुछ पा कर तो हर कोई मुस्कुराता है.
ज़िन्दगी उसी की होती है,
जो सब खो कर भी मुस्कुराना जानता है.