मस्त विचार 385
सारी उम्र बस एक ही “सबक” याद रखना,
दोस्ती और इबादत में बस नियत साफ़ रखना.
दोस्ती और इबादत में बस नियत साफ़ रखना.
ऐसा ना हो के खुद से भी बिछड़ जाऊं और तू भी ना मिले….
पता ही नहीं ज़िन्दगी साँसों से चल रही है या तेरी यादों से.
जिधर भी देखूँ,,,,,,”तू-ही-तू” बिखरी पड़ी है..
कुछ लोग फिर पेश आ रहे हैं बहुत प्यार से….!!
वह कई प्रकार के सुखों को अपने साथ जोड़ लेता है.