मस्त विचार 384

यूँ ना खींच अपनी तरफ मुझे बेबस कर के…..

ऐसा ना हो के खुद से भी बिछड़ जाऊं और तू भी ना मिले….

मस्त विचार 383

तुझे याद करना भी अब दिल का धड़कना सा बन गया है,

पता ही नहीं ज़िन्दगी साँसों से चल रही है या तेरी यादों से.

मस्त विचार 382

कहाँ-कहाँ से इकट्ठा करूँ, “ऐ ज़िंदगी” तुझको,

जिधर भी देखूँ,,,,,,”तू-ही-तू” बिखरी पड़ी है..

मस्त विचार 380

जो इन्सान परिवर्तनों को ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार कर लेता है,

वह कई प्रकार के सुखों को अपने साथ जोड़ लेता है.

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