मस्त विचार 315

डूबे हुए को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारों और,

फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमें ही उतार दिया.

मस्त विचार 314

आज ख़ुदा ने फिर पूछा

तेरा हँसता चेहरा उदास क्यूँ है.

तेरी आँखों में प्यास क्यूँ है.

जिस के पास तेरे लिए वक़्त नहीं

वही तेरे लिए ख़ास क्यूँ है.

मस्त विचार 313

ज़िन्दगी उसी को आजमाती है,

जो हर मोड़ पे चलना जानता है.

कुछ पा कर तो हर कोई मुस्कुराता है.

ज़िन्दगी उसी की होती है,

जो सब खो कर भी मुस्कुराना जानता है.

मस्त विचार 311

बही प्रेम की अमृत- धारा, जिससे छाया है नशा तुम्हारा.

तुझको देखा तो छलके नयन हैं, ऐ यार है तुझको नमन है.

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