मस्त विचार – है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है – 288

है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है.

है रंगीन मगर दुनिया को बेरंग नजर आता है.

कठोरता उसकी फ़ितरत नहीं.

लोगों की फ़ितरत है उसे कठोर समझना.

ख़ामोशी उसकी आदत नहीं.

लोगों की गलतफहमी है उसे खामोश समझना.

है रास्ते में पड़ा पर कुछ नहीं कह पाता है.

है सोचता कहने को बहुत कुछ.

पर जब किसी के पैरों तले आ जाता है.

खुद चलते नहीं संभल कर, दुनिया वाले.

सौ गालियां देने से चूकते नहीं, दुनिया वाले.

रहते हो पत्थर की नीवं में तुम.

पूजते हो पत्थर की ही मूरत तुम.

समझना हो तो पत्थर के दिल को समझ लो.

पत्थर के जैसा अडिग बन कर.

दुनिया में अपनी भी जीत हासिल कर लो.

बस यही पत्थर की जुबानी है.

पत्थर की छोटी- सी यही कहानी है.

है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है.

है रंगीन मगर दुनिया को बेरंग नजर आता है.

मस्त विचार 287

अक्सर वही लोग आप पर उठाते है उँगलियाँ,,

जिनकी तमन्ना आप से बराबरी करने की तो है ….

लेकिन औकात नहीं…!!

मस्त विचार 286

मैं जैसा भी हूँ…………अच्छा या बुरा……..अपने लिए हूँ…

मैं खुद को नहीं देखता……………..औरों की नजर से……

मस्त विचार 284

खाने में कोई ‘ज़हर’ घोल दे तो एक बार उसका ‘इलाज’ है.

लेकिन

‘कान’ में कोई ‘ज़हर’ घोल दे तो, उस का कोई ‘इलाज’ नहीं है.

मस्त विचार 283

कभी सोचा न था कि ?

मुस्कुराने की आदत भी कितनी मंहगी पड़ेगी हमको.

छोड़ दिया सब ने ये सोच कर

हम तो अकेले भी खुश रह लेंगे.

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