मस्त विचार 303
करता है जिसे सजदा इतनी शिददत से,
क्या है वाकिफ भी तू उसकी हकीकत से.
क्या है वाकिफ भी तू उसकी हकीकत से.
वरना..
पत्थर तो अपना फर्ज निभा दिया ही करते हैँ…
हर शख्श कह रहा है कि ज़माना खराब है……
अगर यह भी हम सोचेंगे तो लोग क्या सोचेंगे ?
के जिस के भी लबों पे आए, मुस्कुराहट के साथ आए.