मस्त विचार 282

तूने कब सींचा मै हरा हो गया.

तूने कब कर दी ये शीतल छाया.

अब मुझको बस तू ही संभाले.

अब तो जीऊँगा तेरे ज्ञान के सहारे.

मस्त विचार 281

ज़िंदगी

कमरे की दीवार पर

लगे कलैंडर से मिलती जुलती होती है…

जिस पर हर दिन नयी तारीख आती है.

नया हफ्ता आता है. साल बदल जाता है.

ज़िंदगी में भी हर दिन, एक नयी समस्या से

झूझना पड़ता है..

हर हफ्ते सोच बदलती है..

हर साल कोई साथ छोड़ता है.

कोई नया साथ बनता है..

कलैंडर को तो देख कर पता चल जाता है

कल नयी तारीख आयेगी..

पर ‪ज़िंदगी‬ में पता नहीं चल पाता

कल कौन सी ‪समस्या‬ सर उठाएगी…

मस्त विचार 280

हिचकियों से एक बात का पता चलता है कि कोई हमें याद तो करता है,

बात न करे तो क्या हुआ

कोई आज भी हम पर कुछ लम्हें बरबाद तो करता है.

 

मस्त विचार 279

जिस दिन आप ने अपनी सोच बड़ी कर ली,

उस दिन से बड़े बड़े लोग आपके बारें में सोचना शुरु कर देगें. 

मस्त विचार 278

मेरी बरबादी पे तू जम कर जश्न मना पर याद

रख वक्त किसी का सगा नही होता………..

रोशनी तो वक्त के हिसाब से बदलती रहती है

हर जगह हमेशा अंधेरा नही होता………… 

मस्त विचार 277

जीने के लिए सोचा ही नहीं, दर्द संभालने होंगे…

मुस्कुराए तो, मुस्कुराने के कर्ज़ उतारने होंगे..!!!

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