मस्त विचार 282
तूने कब कर दी ये शीतल छाया.
अब मुझको बस तू ही संभाले.
अब तो जीऊँगा तेरे ज्ञान के सहारे.
तूने कब कर दी ये शीतल छाया.
अब मुझको बस तू ही संभाले.
अब तो जीऊँगा तेरे ज्ञान के सहारे.
कमरे की दीवार पर
लगे कलैंडर से मिलती जुलती होती है…
जिस पर हर दिन नयी तारीख आती है.
नया हफ्ता आता है. साल बदल जाता है.
ज़िंदगी में भी हर दिन, एक नयी समस्या से
झूझना पड़ता है..
हर हफ्ते सोच बदलती है..
हर साल कोई साथ छोड़ता है.
कोई नया साथ बनता है..
कलैंडर को तो देख कर पता चल जाता है
कल नयी तारीख आयेगी..
पर ज़िंदगी में पता नहीं चल पाता
कल कौन सी समस्या सर उठाएगी…
बात न करे तो क्या हुआ
कोई आज भी हम पर कुछ लम्हें बरबाद तो करता है.
उस दिन से बड़े बड़े लोग आपके बारें में सोचना शुरु कर देगें.
रख वक्त किसी का सगा नही होता………..
रोशनी तो वक्त के हिसाब से बदलती रहती है
हर जगह हमेशा अंधेरा नही होता…………
मुस्कुराए तो, मुस्कुराने के कर्ज़ उतारने होंगे..!!!