मस्त विचार 362
हर ज़ख्म की आगोश में है दर्द तुम्हारा……..
हर दर्द में सुकून का एहसास भी तुम हो………..
हर दर्द में सुकून का एहसास भी तुम हो………..
इससे ज्यादा जिंदगी की मुझे, जरुरत भी नहीं.
पास रह कर ही कोई रिश्ता ख़ास नहीं होता.
तुम इतने मेरे पास हो कि ,
दूरियों का एहसास नहीं होता.
मुझ से कोई मुझ सा नहीं देखा जाता………..
क्यूँ उदास रहता हूँ.
क्यूँ समस्याओं से उलझा हूँ.
मेरा तो काम है चलना.
शायद ये भूल जाता हूँ कि
राहों से निकलती हैं राहें.
अभी तो मुझे कई मंजिलों को तय करना है.
अभी तो जीवन में और सफर करना है.
पहले भी जब सफर पे निकला था.
तू ने ही मुझे मंजिल तक पहुँचाया था.
ऐ यार, फिर भी उदास तथा दुविधाओं में क्यूँ हूँ ?