मस्त विचार 264

मेरे कदम से कदम मिला यार.

मेरी आँख से आँख मिला यार.

मेरे संग साथ रहो मेरे यार.

तेरे होने से खुद ही मौसम महकेगा.

तेरे साथ से दुनिया के सारे नज़ारों को भी थाम लूँगा.

विष अमृत में खुद बदलेगा यार.

मेरे कदम से कदम मिला मेरे यार.

मस्त विचार 262

“अँधेरा” सिर्फ एक शब्द भर नहीं है मेरे लिए

पूरी कहानी है, जिसे ढोया है मैंने सालों से एक बोझ कि तरह.

मस्त विचार 261

काम ऐसे कीजिए जिस मे हो सब का भला.

बातें ऐसे कीजिए जिनमे हो अमृत्त भरा.

मीठी बोली बोल सब को प्रेम से पुकारिए.

कड़वे बोल बोल के न ज़िन्दगी गुजारिए.

हँसते- मुस्कुराते हुए ज़िन्दगी गुजारिए.

मस्त विचार 259

उन लोगों का क्या हुआ होगा,

जिनको मेरी तरह गम ने मारा होगा.

किनारे पर खड़े लोग क्या जाने,

डूबने वाले ने किस किस को पुकारा होगा.

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