मस्त विचार 270
इस *दुनिया* में~
बाद में *पता* चला की सब *चाहते* हैं~
*अपनी ज़रूरत के लिए*..!!!
इस *दुनिया* में~
बाद में *पता* चला की सब *चाहते* हैं~
*अपनी ज़रूरत के लिए*..!!!
किसे इस लहर में जा कर किनारा याद रहता है ?
सफ़र-ए-ज़िन्दगी का एक मुसाफ़िर सा मैं.., ख़ुद को
कहाँ ढुढ़ू ? अब मुझको चेहरा तुम्हारा याद रहता है………..
पर क्यों रहूँ उदास, एक उम्मीद है बाकी……..
_ मन का घोड़ा खूब दौड़ाया, थक हार कर पास तेरे आया.
_ मन विछेप से भरा पड़ा था, मोह ममता से जला पड़ा था.
_ झूल रहा था अज्ञानता का झूला, आनन्द रूप हूँ था कब से भूला.
_ तू ने जोड़ लिया संग अपने, फिर मुझे काहे की देर थी.
_ तू ने जो ज्ञान सुनाया, मेरा आनन्द रूप मुझको जनाया.
_ भटक रहा था अन्धकार में, तेरा सहारा मुझे मिल गया.
वो लोग हमेशा अकेले पाये जाते हैं..,
जो दिल और जुबान के सच्चे होते हैं…
तो समझ लेना चाहिए की आप जीवन में सफल हो रहें हैं.