मस्त विचार 291
तू मिल गया मुझे कोई प्यास नहीं.
तू पिलाते ही रहना मै पीता रहूँगा.
तेरा साथ अब मै कभी ना छोडूंगा.
तू मिल गया मुझे कोई प्यास नहीं.
तू पिलाते ही रहना मै पीता रहूँगा.
तेरा साथ अब मै कभी ना छोडूंगा.
मेरे दरवाज़े पे पहरा न बिठाओ लोगो…….
रास्ते बदलना मेरी फिदरत में नहीं है .
है रंगीन मगर दुनिया को बेरंग नजर आता है.
कठोरता उसकी फ़ितरत नहीं.
लोगों की फ़ितरत है उसे कठोर समझना.
ख़ामोशी उसकी आदत नहीं.
लोगों की गलतफहमी है उसे खामोश समझना.
है रास्ते में पड़ा पर कुछ नहीं कह पाता है.
है सोचता कहने को बहुत कुछ.
पर जब किसी के पैरों तले आ जाता है.
खुद चलते नहीं संभल कर, दुनिया वाले.
सौ गालियां देने से चूकते नहीं, दुनिया वाले.
रहते हो पत्थर की नीवं में तुम.
पूजते हो पत्थर की ही मूरत तुम.
समझना हो तो पत्थर के दिल को समझ लो.
पत्थर के जैसा अडिग बन कर.
दुनिया में अपनी भी जीत हासिल कर लो.
बस यही पत्थर की जुबानी है.
पत्थर की छोटी- सी यही कहानी है.
है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है.
है रंगीन मगर दुनिया को बेरंग नजर आता है.
जिनकी तमन्ना आप से बराबरी करने की तो है ….
लेकिन औकात नहीं…!!
मैं खुद को नहीं देखता……………..औरों की नजर से……