मस्त विचार 246

तुझ से दूरी का एहसास सताने लगा,

तुझ संग गुजरा हर लमहा याद आने लगा,

जब भी तुझे भूलाने की कोशिश की,

तू तो और भी करीब लगने लगा.

मस्त विचार 243

 सभी के चेहरे में वो बात नहीं होती,

थोड़े से अँधेरे से रात नहीं होती,

जिंदगी में कुछ लोग बहुत प्यारे होते हैं,

क्या करें उन्ही से हमारी ‘मुलाकात’ नहीं होती.

मस्त विचार 241

सोच रहा हूँ कुछ अपने बारे में लिखूँ.

मन है परेशान उसकी व्यथा क्या लिखूँ.

मिलना- बिछुड़ना सब हो रहा एक साथ.

इसको क्या तो गाऊं और क्या तो रोऊँ.

सुख- दुःख के बीच से ही ज़िन्दगी गुजरी है.

बाकि क्या बताऊँ कि मुझपे क्या गुजरी है.

अब अपने बारे में और क्या लिखूँ.

सुख- दुःख के बीच से ही ज़िन्दगी गुजरी है.

error: Content is protected