मस्त विचार 240
तू याद कर या न याद कर.
फागुन के फूल झरते, फागुन जब आये.
गीत तेरे गाऊँगा, मस्त हो जाऊँगा.
जब तक रहूँ मैं तेरे इस खेल में.
साथ मैं तेरा ही पाऊँ, इसलिए गीत यूँ ही गाऊं.
पास तेरे आऊँ, गीत तेरे गाऊं.
तू याद कर या न याद कर.
फागुन के फूल झरते, फागुन जब आये.
गीत तेरे गाऊँगा, मस्त हो जाऊँगा.
जब तक रहूँ मैं तेरे इस खेल में.
साथ मैं तेरा ही पाऊँ, इसलिए गीत यूँ ही गाऊं.
पास तेरे आऊँ, गीत तेरे गाऊं.
बुरे दिनों में अच्छी बात, कि वो भी एक दिन ख़त्म हो जाते हैं.
ये जो जिंदगी है हर बात का अहसास कराती है.
चेहरा का क्या है, वो तो मेरे साथ ही चला जाएगा एक दिन…
जीत भी जाता हूँ कभी मैं हार जाने के लिए,
ये जिंदगी ही है ऐसी जिसका कुछ पता नहीं,
दूर जाता हूँ कभी मैं पास आने के लिए,
समझते जो मुझे दुश्मन ये उनकी ही है समझ
मैं तो खड़ा हूँ हर घड़ी सिर झुकाने के लिए,
गीत गाता हूँ तुम्हे पाने के लिए.
जरा सा अपने लिए क्या सोचा , जमाना दुश्मन बन गया.