मस्त विचार 319

दर्दे दिल, ज़ख्मे तमन्ना और तन्हाई के मंज़र….

कैसे- कैसे मेहरबां साथी बना लेता हूँ मैं…….

मस्त विचार 315

डूबे हुए को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारों और,

फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमें ही उतार दिया.

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