मस्त विचार 314

आज ख़ुदा ने फिर पूछा

तेरा हँसता चेहरा उदास क्यूँ है.

तेरी आँखों में प्यास क्यूँ है.

जिस के पास तेरे लिए वक़्त नहीं

वही तेरे लिए ख़ास क्यूँ है.

मस्त विचार 313

ज़िन्दगी उसी को आजमाती है,

जो हर मोड़ पे चलना जानता है.

कुछ पा कर तो हर कोई मुस्कुराता है.

ज़िन्दगी उसी की होती है,

जो सब खो कर भी मुस्कुराना जानता है.

मस्त विचार 311

बही प्रेम की अमृत- धारा, जिससे छाया है नशा तुम्हारा.

तुझको देखा तो छलके नयन हैं, ऐ यार है तुझको नमन है.

मस्त विचार 309

गीता हूँ कुरआन हूँ मैं ; मुझको पढ़ इंसान हूँ मैं

ज़िन्दा हूँ सच बोल के भी ; देख के ख़ुद हैरान हूँ मैं

इतनी मुश्किल दुनिया में ; क्यूँ इतना आसान हूँ मैं

चेहरों के इस जंगल में ; खोई हुई पहचान हूँ मैं

खूब हूँ वाकिफ़ दुनिया से ; बस खुद से अनजान हूँ मैं

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