मस्त विचार 229
अगर गिर जाता हूँ तो उठता भी तो हूँ.
दोबारा भी गिरूँ, तो उठने की तमन्ना रखता हूँ.
दोबारा भी गिरूँ, तो उठने की तमन्ना रखता हूँ.
इसलिए जरा धीरज रख ले, शायद फिर अपनी सुबह मिले.
हाँ सच है कि गम से बचना है, पर इसका हमसे कहना है.
मैं तुम्हे सिखाने आया हूँ, फौलाद बनाने आया हूँ.
मुझ से इतना घबराओगे, तो ख़ुशी कहाँ से पाओगे.
क्योंकि जगाने का वक़्त आ गया है,
अतः अपनी तरह औरों को भी जगाओ.
ख्वाहिशों में खुद को आधा ना कर;
ये देगी उतना ही जितना लिख दिया
खुदा ने;
इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर.
लेकिन उस के पास न जाना और भी अच्छा.
बाकी आधे सुन कर मन ही मन कहते हैं, अच्छा हुआ, इस के साथ ऐसा ही होना चाहिए.