मस्त विचार 308

रह कर दूर तुझ से बेक़रार रहते हैं,

हालात मेरे मुझे लाचार करते हैं,

आँखें मेरी पढ़ लो कभी,

मै खुद कैसे कहूँ कि,

तुम मुझे याद बहोत आते हो.

मस्त विचार 307

मै इन्तजार में बैठा हूँ यार तेरे.

आज तो उसको महफ़िल में बुला लो यारों.

मेरे मोबाइल पर उसका मैसेज तो पढ़ो यारों.

जिसमे आने का वादा किया था उसने.

मस्त विचार 305

ज़िन्दगी मेरे कानों में हौले से कह गई,

उन रिश्तों को थामे रखना, जिनके बिना गुजारा नहीं.

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