मस्त विचार 302
ठोकरे खाकर भी ना सँभले तो मुसाफिर का नसीब..
वरना..
पत्थर तो अपना फर्ज निभा दिया ही करते हैँ…
वरना..
पत्थर तो अपना फर्ज निभा दिया ही करते हैँ…
हर शख्श कह रहा है कि ज़माना खराब है……
अगर यह भी हम सोचेंगे तो लोग क्या सोचेंगे ?
के जिस के भी लबों पे आए, मुस्कुराहट के साथ आए.
Taste करो तो भी पिघलती है और waste करो तो भी.
इसलिए life को taste करना सीख लो,
वरना waste तो हो ही रही है.