मस्त विचार 243
थोड़े से अँधेरे से रात नहीं होती,
जिंदगी में कुछ लोग बहुत प्यारे होते हैं,
क्या करें उन्ही से हमारी ‘मुलाकात’ नहीं होती.
थोड़े से अँधेरे से रात नहीं होती,
जिंदगी में कुछ लोग बहुत प्यारे होते हैं,
क्या करें उन्ही से हमारी ‘मुलाकात’ नहीं होती.
अब जिसको देखिए उसे अपनी तलाश है……….
मन है परेशान उसकी व्यथा क्या लिखूँ.
मिलना- बिछुड़ना सब हो रहा एक साथ.
इसको क्या तो गाऊं और क्या तो रोऊँ.
सुख- दुःख के बीच से ही ज़िन्दगी गुजरी है.
बाकि क्या बताऊँ कि मुझपे क्या गुजरी है.
अब अपने बारे में और क्या लिखूँ.
सुख- दुःख के बीच से ही ज़िन्दगी गुजरी है.
तू याद कर या न याद कर.
फागुन के फूल झरते, फागुन जब आये.
गीत तेरे गाऊँगा, मस्त हो जाऊँगा.
जब तक रहूँ मैं तेरे इस खेल में.
साथ मैं तेरा ही पाऊँ, इसलिए गीत यूँ ही गाऊं.
पास तेरे आऊँ, गीत तेरे गाऊं.
बुरे दिनों में अच्छी बात, कि वो भी एक दिन ख़त्म हो जाते हैं.
ये जो जिंदगी है हर बात का अहसास कराती है.