मस्त विचार 217
याद किसे रहते हैं बुरे वक़्त के साथी,
सुबह होते ही लोग चिरागों को बुझा देते हैं.
सुबह होते ही लोग चिरागों को बुझा देते हैं.
अपने घर के लोगों में , बग़ावत हो गई.
वैसे संभालना हम भी जानते थे;
ठोकर भी लगी तो उसी पत्थर से;
जिसे हम अपना मानते थे.
क्योंकि संसार के राजा के साथ रहता हूँ,
उस चाँद को बहुत गुरूर है
कि उसके पास नूर है…..
मगर वो क्या जाने की
मेरा तो यार ही कोहिनूर है.
याद तुमने किया ही नहीं था.
बुला के तो देख मै कैसे न आऊँ.
तेरा हूँ मै तेरे पास ही आऊँ.
क्यों हो नाराज यह बयान तो किजीए.
कर दीजीए माफ़ ग़र हो गई हो ख़ता.
यों खामोश रहकर सजा ना दीजीए.