मस्त विचार 211
कर्म पथ को रह पूजता, बीच में मत छोड़.
कर कोशिश सपनों को परवान चढाने की.
खुद ही खुद को यूँ मझधार में मत छोड़.
कर्म पथ को रह पूजता, बीच में मत छोड़.
कर कोशिश सपनों को परवान चढाने की.
खुद ही खुद को यूँ मझधार में मत छोड़.
पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर.
खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई.
मेरी मन्जिल मेरा हौसला देख कर.
और सजा लो कुछ नयी सदभावनाएँ.
कमबख्त जो भी उस से मिलता है, ज़िन्दगी जीना ही छोड़ देता है.
दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी काला और सफेद रंग सब से बेहतर है.
खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है.
पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है.
देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है.
सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है.
जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतर है.