मस्त विचार 231
मैंने तुमको अपना जाना, अपने से भी ज्यादा माना.
पर इतना सब करने पर भी, तुमने क्या मुझको पहचाना.
तुम तो अब भी पहले जैसे, लगते हो वैसे के वैसे.
मै कितना मजबूर हुआ हूँ, अपनों से भी दूर हुआ हूँ.
पर इतना सब करने पर भी, तुमने क्या मुझको पहचाना.
तुम तो अब भी पहले जैसे, लगते हो वैसे के वैसे.
मै कितना मजबूर हुआ हूँ, अपनों से भी दूर हुआ हूँ.
दोबारा भी गिरूँ, तो उठने की तमन्ना रखता हूँ.
इसलिए जरा धीरज रख ले, शायद फिर अपनी सुबह मिले.
हाँ सच है कि गम से बचना है, पर इसका हमसे कहना है.
मैं तुम्हे सिखाने आया हूँ, फौलाद बनाने आया हूँ.
मुझ से इतना घबराओगे, तो ख़ुशी कहाँ से पाओगे.
क्योंकि जगाने का वक़्त आ गया है,
अतः अपनी तरह औरों को भी जगाओ.
ख्वाहिशों में खुद को आधा ना कर;
ये देगी उतना ही जितना लिख दिया
खुदा ने;
इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर.