मस्त विचार 219

तेरी चाह की चाहत को हम दुनिया से छिपा न सके.

कोशिश तो बहुत की तुझे भुलाने की ,

पर चाह कर भी यार तुझे भुला न सके. 

मस्त विचार 218

आप को छोड़ कर जाऊँगा कैसे,

आप को भूल कर रह पाउंगा कैसे,

आप तो मेरी सांसो में बसे हो,

चाह कर भी सांस रोक पाउंगा कैसे.

मस्त विचार 215

कदम यूँ ही डगमगा गए रास्ते में;

वैसे संभालना हम भी जानते थे;

ठोकर भी लगी तो उसी पत्थर से;

जिसे हम अपना मानते थे.

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