मस्त विचार 187

देखो तो ख्वाब है ज़िन्दगी.

पढ़ो तो किताब है ज़िन्दगी.

सुनो तो ज्ञान है ज़िन्दगी.

हंसकर जियो तो आसान है ज़िन्दगी.

मस्त विचार 186

“ज़िन्दगी तू ही बता तुझे कैसे ना प्यार करूँ?

तेरी हर एक ‘सुबह’ मुझे

अपने से मिलने का जो एहसास दीलाती है”

मस्त विचार 185

निशचय ही मुझे जो कहना है, वह कहा नहीं जा सकता है. और जो कहा जा सकता है, वह मुझे कहना नहीं है. इसलिए ही तो इशारों से कहता हूँ, शब्दों के बीच छोड़े अन्तरालों से कहता हूँ. विरोधाभासों से कहता हूँ, या कभी न कहकर भी कहता हूँ. धीरे- धीरे इन संकेतों को समझने वाले लोग भी तैयार होते जा रहे हैं और न समझने वाले लोग दूर हटते जा रहे हैं – इससे मुझे बड़ी सुविधा होगी.

मस्त विचार 184

भरी दुनिया में अकेला मुझे रहना सीखा दिया.

तेरे प्रेम ने दुनिया को झूठा कहना सीखा दिया.

किसी दर्द या खुशी का अहसास नहीं है अब तो.

सब- कुछ जिन्दगी में चुप- चुप सहना सीखा दिया.

मस्त विचार 183

तुम आये थे हमे अमरित पिलाने,

हमने तुम्हे ही विष पिलाया!

कैसा है आदमी मौला

के आज भी जीना न आया!!

रो रहे कुछ लोग तेरे प्यार में

रह रह तडप उठते हुआ जो तुम पर

हुकूमतें लेकिन वही हैं

सुकरात को जिनने जलाया!!

अच्छे लोग हैं कमतर

जाहिलों की दुनिया है

कभी मंसूर को काटा

कभी हजरत को सताया!!

तुम आये थे अमरित पिलाने

हमने तुम्हे ही विष पिलाया!!

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